फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

18 responses to “ट्विटर,फ़ीड और खामोशी”

  1. ताऊ रामपुरिया

    शुक्ल जी , आपके देखादेखी हम भी टवीटराने गये थे पर हमसे नही टवीटराया गया..कुछ समझ मे ही नही आया..अब आपकी पोस्ट पढकर भी नही समझें.

    किसी दहेज-मंगते को जब कोई कन्या मंडप से दुत्कारे
    शर्मिंन्दगी संग उसके थोबड़े पे चिपक जईयो री तुमखामोशी।

    वाह वाह..क्या गजब की बात कही है सबेरे सबेरे, शुभकामनाएं.

    रामराम.

  2. puja

    हमसे तो ट्विटर नहीं हो पायेगा, एक लाइन में कुछ भी नहीं होता हमारा…हम ब्लॉग पर ही भले हैं और हैप्पी हैं. फीड ही नहीं आपका ब्लॉग भी नखरे दिखा रहा है…आज भगवान का नाम लेकर खोला तो खुल गया. आपकी कविता पढ़कर हम खामोश हो गए…अब अगली पोस्ट तक कुछ भी नहीं कहेंगे :)

  3. महामंत्री तस्‍लीम

    खामोशी को कोट करके सुंदर चित्र खीचें हैं।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  4. काजल कुमार

    ट्विट्टर दीवार की तरफ मुंह करके गाली देने जैसा है.
    जाओ, भड़ास निकल आओ…कोई पढ़े-सुने या न पढ़े-सुने, मेरी बला से :)

  5. kanchan

    हाय रे खामोशी….! आप के शेर देख कर खामोश हो गई है शायद।

  6. dr anurag

    टेक्निकली बेकवर्ड है जी …इसलिए फीड ओर दूसरे खेल समझ नहीं आये .ट्विटर भी…..कित्ती जगह खाते खोले .ओर कित्ते पासवर्ड याद रखे ….

  7. amit

    तो हुआ यह हुआ क्या अक्सर यह होता है हमारे इस फ़ुरसतिया ब्लाग की फ़ीड अक्सर गड़बड़ा जाती है और हमारी पोस्ट चिट्ठाजगत में दिखती नहीं।

    अपन तो ब्लॉगलाइन्स में पढ़ते हैं, वहाँ आपके ब्लॉग की फीड दिख जाती है रोज़ाना (या जब भी छापते हैं)। :)

  8. मीनाक्षी

    अब समझे…टिवटर भेजा नही गया था ,,आ गया था…लेकिन हमने स्वीकार कर लिया और संजो कर रख लिया… आपकी ‘खामोशी’ तो बहुत कुछ कह गई….!!!

  9. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    एक बार चहके और फिर खामोश हो गये!
    मैं आपके लिये नहीं, अपने लिये कह रहा हूं!

  10. काशिफ आरिफ

    हम तो वहा पेहले से मौजुद है, आप लोगो को काफी वक्त लग गया आने मे

    अपने ब्लोग पर इश्तिहार दिखाने और कुछ पैसा कमाने के लिये यहा चट्का लगाये…

    http://www.bidvertiser.com/bdv/bidvertiser/bdv_ref.dbm?Affiliate_ID=25&Ref_Option=pub&Ref_PID=236711

  11. Tarun

    chithhacharcha wali problem thik ho gayi hai…..ab sab dikh reha hai. Koi problem aaye to appko pata hai bus ek mail ki duri per hum hain.

  12. Abhishek Ojha

    हमने तो अपने रीडर के शेयर्ड आइटम की फीड लगा रखी है ट्विट्टर पे. कभी-कभी कुछ ठेल भी देते हैं :) ‘खामोशी’ तो फैशन के इस दौर में गारंटी के साथ चल रही है जी !

  13. Nishant

    सरजी. ट्विटर तो हमें रास नहीं आया. इतने लोग इतनी तारीफ करते हैं उसकी, हो सकता है हम ही नादान हैं जो उसकी अहमियत नहीं समझ पा रहे. बाकि, बढ़िया है, हमेशा की तरह. आपकी गिनती यूँही बेहतरीन ब्लौगरों में नहीं होती!

    हिंदी में प्रेरक कथाओं, प्रसंगों, और रोचक संस्मरणों का एकमात्र ब्लौग http://hindizen.com

  14. venus kesari

    फुरसतिया जी आपकी गजल बिलकुल बहर में नहीं है जा कर नियमित गुरु जी से क्लास लीजिये :)

    वीनस केसरी

  15. anitakumar

    सुबह,दोपहर,शाम की सब मौजूद हैं यहां खामोशियां
    आपको कौन सी दरकार है बताइये तौल दूं वो खामोशी।

    वाह क्या बात है। टिवटर में ऐकाउंट तो बहुत पहले बना लिए थे टिवटराने की कौशिश करेगें । वैसे हमने देखा कि फ़ेसबुक पर भी पूरा हिन्दी ब्लोगजगत न सिर्फ़ छाया हुआ है बड़ी धूम भी मचाये हुए है। सबसे ज्यादा आश्चर्य तो हमें ज्ञान जी को वहां देख कर हुआ।

  16. Laxmi N. Gupta

    “ट्विटर के और भी व्यवहारिक उपयोग हैं। दोहा,चौपाई,सोरठा,हायकु लिखने वाले ट्विटर का उपयोग इसके लिये कर सकते हैं क्योंकि ट्विटर शब्द संख्या बताता रहता है कि इत्ते शब्द खर्च कर चुके हैं आप।”

    यह तो बहुत सुन्दर आइडिया है। कविता “खामोशी” भी बहुत अच्छी लगी।

  17. himanshu

    हम तो ट्विटर पर थे, पर जब आपने हमें फ़ॉलो किया तो हमें लगने लगा कि चलो बेकार ही नहीं थे वहाँ ।

    “फ़ीड गड़बड़ है तो आपका लिखा राहत सामग्री की तरह इधर-उधर छितराया रहेगा कभी जरूरतमंद तक नहीं पहुंचेगा।” अजब-गजब उपमायें ढूँढ़ लेते हैं आप । मजेदार ।

  18. गौतम राजरिशी

    ट्वीटर तो समझ में नही आया…आपका निमंत्रण मिला था…
    खामोशी की बातें बहुत अच्छी लगी

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