रविवार, १९ जून २०११

संस्कारधानी के अपनत्व का कायल हूँ - राकेश भ्रमर.

                          अपनी पद स्थापना के पूर्व से ही मैं जबलपुर के साहित्यकारों और संस्कारों से परिचित था.   यहाँ के लोगों का खुले दिल से मिलना अन्यत्र दुर्लभ है.    मैं संस्कारधानी के अपनत्व का  कायल हूँ.    ड्रीमलेण्ड, सिविक सेण्टर में वर्त्तिका द्वारा आयोजित विदाई समारोह में ये भावाभिव्यक्ति  थी जबलपुर से दिल्ली स्थानान्तरित हुए मासिक प्राची के सम्पादक श्री राकेश भ्रमर की.   कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जवाहर लाल तरुण, विशिष्ट अतिथिद्वय कामता सागर एवं अन्शलाल पंद्रे ने श्री भ्रमर को उनके यशस्वी जीवन की शुभकामनाएँ दी. वर्त्तिका के सम्पादक डॉ. साज़ जबलपुरी ने भ्रमर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला.   ओंकार श्रीवास्तव,  डॉ. अनामिका तिवारीमनोहर शर्मा माया,  मोहन लाल लोधिया, मनोहर चौबे आकाश, कुँवर प्रेमिलमुइनुद्दीन अतहर,  मुकुल दत्ता अर्पित, संध्या श्रुति,  सुनीता मिश्रा ने भी श्री भ्रमर का अभिनन्दन कियाआभार प्रदर्शन डॉ. गीता गीत एवं संचालन विजय तिवारी 'किसलयद्वारा किया गया.     कार्यक्रम का द्वितीय चरण वर्तिका की मासिक गोष्ठी के साथ संपन्न हुआ   

रविवार, २९ मई २०११

२९ मई २०११ को संपन्न वर्त्तिका की मासिक काव्य गोष्ठी के वीडियो अंश.

आज दिनांक २९ मई २०११ को वर्तिका संस्था जबलपुर की काव्य गोष्ठी ड्रीम लेण्ड फेन पार्क में संपन्न हुई.  मासिक काव्य गोष्ठी के वीडियो अंश हम आपके लिए  प्रस्तुत कर रहे हैं,  उम्मीद है आप सब इसका लाभ लेंगे:-

 वर्तिका  काव्य  गोष्ठी  २९  मई    २०११  सचिन  पाण्डेय - सुभाष  जैन  शलभ - योगेश्वर  शर्मा -और  विपिन  विश्वकर्मा:-
http://bambuser.com/v/1698045
 वर्तिका  काव्य  गोष्ठी  २९  मई   २०११  वर्षा  शर्मा  रैनी- गणेश  श्रीवास्तव  प्यासा  और   राजेंद्र  जैन  रतन:-
http://bambuser.com/v/1698087
वर्तिका  काव्य  गोष्ठी  २९  मई   २०११  डॉ  विजय  तिवारी  "किसलय"  
और  सोहन  परौहा  सलिल:-
http://bambuser.com/v/1698128
वर्तिका  काव्य  गोष्ठी  २९  मई   २०११  श्री  एम एल  बहोरिया  और 
 प्रभा  पाण्डेय  पुरनम:-
http://bambuser.com/v/1698153
वर्तिका  काव्य  गोष्ठी  २९  मई   २०११  श्री  साज़  जबलपुरी  और 
अंशलाल पंद्रे  जी:-
http://bambuser.com/v/1698188
 
प्रस्तुति -
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 विजय तिवारी "किसलय"

रविवार, २२ मई २०११

एक ख़ुशी- एक ग़म


       प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त.
 


(प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी)

                                              रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में पदस्थ अर्थशात्र के प्रोफ़ेसर अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में शीघ्र ही पदभार ग्रहण करेंगे. हिमाचल प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के कुलपति का राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षरित नियुक्ति आदेश उन तक पहुँच चुका है. ज्ञातव्य है कि
प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी एक समय अवधेश प्रताप सिंह रीवा विश्वविद्यालय सहित चित्रकूट विश्वविद्यालय का दोहरा कार्यभार सम्हाल चुके हैं. ओजस्वी व्यक्तित्व एवं विशिष्ट कार्यशैली के कारण वे सदैव भीड़ से हटकर दिखाई दिए हैं. अर्थशास्त्र जैसे जटिल विषय के महारथी होने के साथ ही प्रो. बाजपेयी एक अच्छे साहित्यकार और कवि भी हैं. मुझे ख़ुशी है कि मुझे उनका सानिध्य प्राप्त हुआ है.  उनके सुरीले कंठ और भावाभिव्यक्ति का मैं कायल हूँ. संस्कारधानी जबलपुर ऐसे व्यक्तित्व को चिरस्मृतियों में रखेगा.  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय  के कुलपति बनने पर उन्हें हिंदी साहित्य संगम जबलपुर की अशेष
शुभ भावनाएँ.

                   कुछ दिन पूर्व मेरे द्वारा रिकार्ड की गयी प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी की एक कविता आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है:-


रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव का निधन
 
(प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव)
              रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे. दिनांक २१ मई ११ को उनके निधन से संस्कारधानी  जबलपुर का शिक्षा, साहित्य एवं उर्दु जगत स्तब्ध रह गया. प्रो. श्रीवास्तव जबलपुर के पूर्व महापौर एवं वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय श्री पन्नालाल श्रीवास्तव "नूर" के सुपुत्र थे. यह क्रूर नियति का कहर ही कहलायेगा कि उनके अनुज श्री विश्वतोश श्रीवास्तव (ओम जी ) का पिछले रविवार दिनांक १५ मई २०११ को अचानक हुए हृदयाघात से निधन हुआ है.
               प्रो. श्रीवास्तव रा. दु. वि. वि. जबलपुर के रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष थे. कुछ समय पूर्व उन्हें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति का प्रभार सौंपा जाना उनकी अपनी विलक्षण प्रतिभा का ही परिचायक था.  

( विजय तिवारी "किसलय" एवं प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव)
                                   प्रो. श्रीवास्तव को फारसी, और उर्दु साहित्य का गहन ज्ञान होने के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी बराबर नियंत्रण था. इनकी अद्भुत प्रतिभा को साहित्य और शिक्षा जगत सदैव याद रखेगा.



       मैं स्वयं उनकी अभिवक्ति, लहजे और शब्द सामर्थ्य का हमेशा प्रशंसक रहा हूँ. मैं जानता हूँ कि जबलपुर वासी अपने अजीज "आशुतोष" की कमी एक लम्बे अरसे तक महसूस करेंगे. हिंदी साहित्य संगम जबलपुर की उन्हें विनम्र  श्रद्धांजली.


प्रस्तुति-
















डॉ. विजय तिवारी "किसलय"




शनिवार, ३० अप्रैल २०११

संस्कारधानी जबलपुर के चिट्ठाकार गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" दिल्ली में हिंदी साहित्य निकेतन एवं परिकल्पना द्वारा दिनांक ३० अप्रेल २०११ को वेब कास्टिंग के लिए सम्मानित होंगे.

संस्कारधानी जबलपुर के चिट्ठाकार गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" दिल्ली में हिंदी साहित्य निकेतन, एवं परिकल्पना के तत्वावधान में दिनांक 30 अप्रैल 2011 आयोजित होने जा रहे एक सम्मान समारोह में " वेबकास्टिंग" के लिये सम्मानित होंगे. यह सम्मान हिंदी चिट्ठाकारिता (ब्लागिंग ) में उनके अवदान के लिये उत्तरांचल के मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल द्वारा दिया जावेगा. इन्होंने हिंदी चिट्ठाकारिता में पाड्कास्टिंग (आडियो पोस्ट), वाडकास्टिंग (वीडियो-पोस्ट), तथा लाइव वीडियो प्रसारण अर्थात वेबकास्टिंग के ज़रिये भारत एवं विदेशों मे बसे चिट्ठाकारों, कलाकारों, साहित्यकारों, पत्रकारों से सामाजिक एवं ब्लागिंग के मसले पर लाइव तथा रिकार्डेड भेंट वार्ताएँ हिंदी को अंतरजाल पर लाने के लिये की हैं. उल्लेखनीय है कि स्वीडिश वेबसाइट के www.bambuser.com के ज़रिये लाइव संस्कारधानी से गिरीश बिल्लोरे ने न केवल साक्षात्कार ही लिये बल्कि उत्तराखण्ड के खटीमा शहर में हुए ब्लागर्स सम्मेलन की घर बैठे वेबकास्टिंग कर दुनिया के नक्शे पर जबलपुर का नाम अंकित कर दिया, जिसकी चर्चा देश विदेश की पत्र पत्रिकाओं में भी की गई है. इतना ही नहीं उक्त कार्यक्रम का लाइव प्रसारण http://www.nukkadh.कॉम , http://sanskaardhani.blogspot.कॉम , तथा http://editers.blogspot.com/ , http://hindisahityasangam.blogspot.com/ पर दिनांक 30 अप्रैल 2011 को शाम तीन बजे से उपलब्ध होगा. चिट्ठाकार एवं साहित्यकार श्री गिरीश बिल्लोरे का कहना है "रचनात्मकता सोच उपलब्धियों की चाबी है – सृजन नैगेटिविटी के दुष्परिणामों से बचाता है "

प्रस्तुति:-

डॉ विजय तिवारी "किसलय"