बस यूं ही

पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के साइड इफ़ेक्ट

पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के साइड इफ़ेक्ट

शायरों और न्यूज चैनलों में एक समानता होती है। दोनों किसी भी घटना को सबसे पहले बयान करने की बेकली से पीड़ित होते हैं! उनको लगता है कि अगर किसी घटना को सबसे पहले न दिखाया/बयान किया तो इतिहास उनको भले माफ़ कर दे लेकिन उनके पेशे का भूगोल बिगड़ जायेगा। पेट्रोल के दाम बढ़े [...]

…और ये फ़ुरसतिया के सात साल

…और ये फ़ुरसतिया के सात साल

…..और मजाक-मजाक में हमारी चिट्ठाकारी के सात साल निकल लिये! कोई गड़बड़ नहीं भाई इसके पहले एक , दो ,तीन , और चार , पांच और छह भी निकले इज्जत के साथ! इन सात सालों के अनुभव मजेदार रहे। झन्नाटेदार भी। याद करते हैं कि विन्डॊ 98 के जमाने में, जयहनुमान सुविधा के सहारे, छहरी [...]

मेरी यादों में डा.अमर कुमार

मेरी यादों में डा.अमर कुमार

डा.अमर कुमार पिछले हफ़्ते हमसे हमेशा के लिये विदा हो गये। उनको गये हफ़्ता होने को आया लेकिन यकीन नहीं होता कि वे अब हमारे बीच नहीं रहे। इस बीच उनकी कई पोस्टें पढ़ीं। उनकी टिप्पणियां पढ़ीं। उनका इंटरव्यू पढ़ा। हर बार ऐसा लगा कि यहीं किसी मोड़ पर वे आकर कुछ ऐसा टिपियायेंगे जिससे [...]

अपना लक पहिन के चलो…

अपना लक पहिन के चलो…

ब्रिटेन में गई अपनी टीम इंडिया क्रिकेट वाली अभी जरा पिटन मोड में चल रही है। प्रेम से पिट रही है। हारे चली जा रही है। पहले तो बेचारी टीम इंडिया बड़ी परेशानी में थी। वो सोच रही थी कि इधर वह हार रही है उधर उसे देश में हचक के गालियां मिल रही होंगी। [...]

…कुछ बेसिर-पैर की बातें

…कुछ बेसिर-पैर की बातें

अक्सर मैं ऐसी-ऐसी बातें सोचता हूं कि उनको बेसिर-पैर की बातें ही कहा जा सकता है। इन बातों में कुछ सामाजिक जीवन के मुद्दे होते हैं और कुछ विज्ञान से। और न जाने कित्ते इधर-उधर से। कोई सिलसिला नहीं इनका। लेकिन इस तरह की बातें आती अक्सर रहती हैं दिमाग में। जैसे कि जब से [...]