सदा रहे मंगलमय जीवन


निमंत्रण पत्र

दो दिन पहले जब हम अपनी बिटिया भतीजी स्वाति के विवाह के लिये बरतन आदि खरीदने गये तो तमाम शब्दों से एक बार फिर रूबरू हो रहे थे। द्वारचार के बरतन, करसावन के बरतन, पंचहड़ के बरतन! दरवाजे पर लगाने के दुकान पर लगाकर देखे जा रहे थे। पांच, सात, नौ जैसी औकात हो वैसे बरतन। बरतन खरीदने के बाद कुछ बरतनों पर नाम लिखने के लिये वहीं दे दिये गये। हमने नाम पूछने वाले के पेशे के नाम के बारे में पूछा। बताया गया इनको नाम लिखने वाला ही कहते हैं।

हम अनामदास की पोस्ट के बारे में सोच रहे थे। जो जितना ज्यादा बाहर घूमता है उसकी शब्द संपदा उतनी ही बढ़ती है। कई शब्द हम नये सिरे से सीख रहे थे। एक कटोरा खरीदा गया। बताया गया कि कटोरा कांसे का होना चाहिये। एक की आकृति को देखकर हमारी श्रीमतीजी बोली -ये कटोरा देंगे लड़के वालों को? ये तो भीख मांगने का कटोरा लगता है। कटोरा बदला गया।
हमें राहत इंदौरी का शेर याद आया-

वो खरीदना चाहता था कांसा मेरा,
मैं उसके ताज की कीमत लगा के लौट आया।

हमें लगा शायद पहले भिक्षापात्र कांसे के बनते हों।

बहरहाल, जैसा आज राकेश खंडेलवालजी ने बताया कि आज हमारी भतीजी का विवाह होना तय हुआ है। बिटिया स्वाती हमारे बड़े भाई की बिटिया है। बचपन से हमारे साथ रही। पली-बढ़ी-पढ़ी-लिखी। अब उसका विवाह /कन्यादान हमें ही करना है।
यह संयोग है कि मैं अपने भाइयों में सबसे छोटा हूं लेकिन अपने परिवार की अगली पीढी़ के पहले विवाह की जिम्मेदारी हमें निभानी है।

जो मिलता है कहता है- कन्यादान बड़े पुण्य का काम है। अगर ऐसा है तो परसाई जी क्यों कहते- हमारे समाज की आधी ताकत लड़कियों की शादी करने में जा रही है। यह भी अजीब विडम्बना है कि इस कन्यादान का पुण्य लूटने के फेर में लोग बड़े-बड़े पाप करते हैं। तमाम लोग इसीलिये आय से अधिक सम्पत्ति के फेर में पड़ जाते हैं क्योंकि उनको ढेर सारी सम्पत्ति कन्यादान का पुण्य कमाने में खर्च करनी पड़ती है। कन्या के पिता की स्थिति बयान करते हुये हमारे अजयगुप्त जी लिखते हैं-

सूर्य जब-जब थका-हारा ताल के तट पर मिला,
सच कहूं मुझे वह बेटियों के बाप सा लगा।


स्वाति मेरी गोद में सितंबर १९८३>

बहरहाल हमारी भतीजी स्वाति की आज आठ मई को होना तय हुआ है। हमने कुछ मित्रों को निंमंत्रण पत्र ई-मेल से भेजे हैं।
उनमें मसिजीवी ने इस निमंत्रण को वीरता पूर्वक स्वीकार किया और कानपुर आने के लिये कमर कसी। आने को तो प्रत्यक्षाजी भी आतीं लेकिन उनके आने में मजबूरी थी। घर परिवार की व्यस्तताओं के चलते आ नहीं पायीं।

कुछ दोस्त इसलिये नहीं आ पा रहे क्योंकि उनके पास कोई काम नहीं है लिहाजा वे व्यस्त हो गये। बहरहाल मसिजीवी आ रहे हैं। उनका स्वागत है। उनको हम राजीव टंडनजी से मिलवायेंगे, आशीषगर्ग से भी मिलन होगा। विनोद श्रीवास्तव से भी मुलाकात होगी। फिर इस मुलाकात का आंखों देखा बयान किया जायेगा।

हम जितना व्यस्त हैं उससे ज्यादा हमें दिखाना पड़ रहा है। वर्ना कोई मानता ही नहीं कि बिटिया की शादी करने जा रहे हैं। आज सोचा कि जो लोग बचे हैं उनको खुला निमंत्रण भेज दिया जाये आने का यह कहते हुये-

भेज रहा हूं नेह निमंत्रण प्रियवर तुम्हें बुलाने को,
हो मानस के राजहंस तुम भूल न जाना आने को।

आप सभी इस अवसर सादर, सप्रेम आमंत्रित हैं। पते और कार्यक्रम के लिंक दिये हैं।


स्वाति, सुमन, अनन्य, सौमित्र और अनूप शुक्ल राकगार्ड्न चंडीगढ़ में जून २००४

आज जब कुछ घंटों के बाद ही स्वाति का विवाह संस्कार संपन्न होना है तब तमाम स्मृतियां उमड़ रही हैं।तमाम सवाल भी।
साल भर पहले जब मेरे मामाजी डा.कन्हैयालाल नंदन घर आये थे तब उन्होंने अपनी आवाज में अपनी बेटी के लिये लिखे छंद हमें सुनाये थे जिसे मैंने टेप कर लिया था। अब अपनी बिटिया के लिये भी वही छंद मैं दोहरा रहा हूं-

बेटी को वाणी से संवार दे ऒ वीणा पाणि!
शक्ति दे, शालीनता दे और संस्कार दे,
लक्ष्मी तू भर दे घर उसका धन-संपदा से
गणपति से कहकर सब संकट निवार दे!

गौरी, तू शिव से दिला दे वरदान उसे
दाम्पत्य पर अक्षत तरुणाई वार दे,
मेरे सुख सपनों के सारे पुण्य ले ले मां तू ,
अपने हाथों से उसकी झोली में डाल दे!

आपसे अनुरोध है कि अपनी उपस्थिति और आशीष से नव-दम्पति को उनके भावी जीवन के लिये मंगलकामनायें प्रेषित करें।

मेरी पसंद

मेरी पसंद में आज भाई राकेश खंडेलवाल का मनोहारी आशीर्वचन जो उन्होंने खास तौर पर स्वाति-निष्काम के लिये लिखा-

सदा रहे मंगलमय जीवन
शुभ आशीष तुम्हें देता हूँ।

बिछें पंथ में सुरभित कलियाँ,
रसमय दिन हों रसमय रतियाँ,
रसभीनी हो सांझ सुगन्धी,
गगन बिखेरे रस मकरन्दी,
जिसमें सदा बहारें झूमे,
ऐसा इक उपवन देता हूँ।

सदा रहे मंगलमय जीवन,
शुभ आशीष तुम्हे देता हूँ।

जो पी लें सागर से गम को,
धरती पर बिखरे हर तम को,
बँधे हुए निष्काम राग में,
छेड़ें प्रीत भरी सरगम को,
जो उच्चार करें गीता सा,
ऐसे अधर तुम्हें देता हूँ।

सदा रहे मंगलमय जीवन,
शुभ आशीष तुम्हें देता हूँ।

जो सीपी की आशा जोड़े,
लहरों को तट पर ला छोड़े,
जो मयूर की आस जगाये,
सुधा तॄषाओं में भर जाये,
जिसमें घिरें स्वाति घन हर पल,
ऐसा गगन तुम्हें देता हूँ।

सदा रहे मंगलमय जीवन,
शुभ आशीष तुम्हें देता हूँ।

सुरभि पंथ में रँगे अल्पना,
मूरत हो हर एक कल्पना,
मौसम देता रहे बधाई,
पुष्पित रहे सदा अँगनाई,
फलीभूत हो निमिष निमिष पर,
ऐसा कथन तुम्हें देता हूँ।

सदा रहे मंगलमय जीवन,
शुभ आशीष तुम्हें देता हूँ।

-राकेश खंडेलवाल

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

31 responses to “सदा रहे मंगलमय जीवन”

  1. समीर लाल

    अब आ तो पा नहीं रहे हैं, तो यहीं से बिटिया और दमाद को शुभाशीष देते हैं. बहुत बहुत आशीष हमारे समस्त परिवार की ओर से.

  2. abhay tiwari

    मंगल हो..!

  3. संजय बेंगाणी

    आपका निमंत्रण समय पर मिल गया था, मगर व्यवसायिक मजबुरीयाँ है, हम शादी में आ नहीं पाएंगे.
    नवदम्पति को मेरे परिवार की ओर से ढ़ेरों मंगलकामनाएं, शुभाशिष.

  4. रवि

    नव दंपत्ति के मंगलमय जीवन हेतु शुभकामनाएँ!

  5. सागर चन्द नाहर

    मेरी तरफ से भी स्वाति जी और निष्कामजी को उनके शुभ विवाह पर हार्दिक बधाईयाँ, वैसे भी अब स्वाति जी हमारे यहाँ रहेंगी सो मिलना मिलाना तो होता ही रहेगा।:)

  6. ghughutibasuti

    मेरी शुभकामनाएँ ।
    घुघूती बासूती

  7. प्रियंकर

    बड़े भाग ले यह घड़ी पास आई . बधाई तुम्हें हो बधाई! बधाई!

    स्वाति और निष्काम को अगणित आशीष और मंगल कामनाएं .

  8. सृजन शिल्पी

    मसिजीवी जी की सदेह उपस्थिति में मेरा प्रतिनिधित्व भी शामिल है और राकेश खंडेलवाल जी के आशीर्वचनों में मेरे स्वरों को भी शामिल मानें। नव-दंपति को हमारी तरफ से मंगलकामनाएँ। उनका जीवन अपने सुन्दर नामों की पावनता को चरितार्थ करे।

  9. हिंदी ब्लॉगर

    नवदम्पति को असीम शुभकामनाएँ!

  10. neelima

    नवदम्पति को हमारी हार्दिक शुभकामनाएं हम तो नहीं आ पाए पर हमारा शुभाषीश मसिजीवी जी ने पहुंचा दिया है ! स्वाति -निष्काम को आपके पूरे परिवार को बधाई !हमारी मिठाई भेज दीजिएगा मसिजीवी जी के हाथ वहां की मिठाई हमने कभी नहीं खाई..

  11. मनीष

    वर -वधू को इस पुनीत अवसर पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  12. masijeevi

    लीजिए हम पहुंच गए हैं और आप ही के शहर से कमेंटिया रहे हैं। स्नेहाशीष देंगे फिर से शाम कॊ और विवरण घर पहुंचकर

  13. Pratik Pandey

    भावी वर-वधु को हार्दिक शुभकामनाएँ।

  14. mamta

    नव दंपत्ति को हार्दिक शुभ कामनाएं

  15. अतुल

    भाई साहब
    बाली उमर में ससुर बनने की बधाई। सारी जनता आपको ससुर के पोज में पगड़ी लगाये बारातियों का स्वागत करते , मिलनी करते , आशीष देते देखने को व्याकुल है। विदाई के बाद दो चार घँटे तान के सो लिजीयेगा और फिर फोटू पोस्ट कर दीजियेगा। साथ भी भाजी वाले लड्डू मठरी की फोटू कतई न भूलियेगा , यहीं से दर्शन करके तृप्त हो लेंगे।

    अतुल

  16. pramod singh

    सब राजी-खुशी निपटे..। शुभकामनाएं।

  17. Sanjeet Tripathi

    बधाई! नव दंपत्ति के मंगलमय जीवन हेतु शुभकामनाएँ!

  18. eswami

    गुरुदेव,
    वर-वधु को हार्दिक शुभकामनाएं और आपको बाली उमर में ससुर बनने के लिये बधाई!
    नवदंपत्ति के चित्र भी हम सबके साथ बांटियेगा!

    जब भी भारत आना होगा सबसे मिलेंगे जरूर.

  19. राजीव

    स्वाति और निष्काम के दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने की बधाई। साथ ही भावी जीवन निष्कंटक, निर्विघ्न रूप से चलता रहे इसके लिये शुभकामनाएं।

    आपके द्वारा प्रकाशित राकेश भाई की कविता बहुत अच्छी लगी और नंदन जी की कविता तो पहले भी आप ही के पास सुनी भी थी, उसका तो कहना ही क्या! इन कविताओं में निहित मंगलकामनाओं को हमारी ओर से भी स्वीकारें। (अब कविता पर भले ही कॉपीराइट हो, पर उनमें निहित भावनाएं तो मुक्त सोर्स की ही हैं – सुन रहे हैं उन्मुक्त जी!)

    हम तो भई स्थानीय हैं – सो हम तो साकार, प्रत्यक्ष रूप में गये और शरीक हुए बारात के स्वागत समारोह में। वहीँ पर अनूप जी के मित्रों और मसिजीवी से भी काफी देर तक गप्पबाजी होती रही।

    कुछ ऐसा संयोग था कि ठीक इसी दिन हमारे भी परिवार में ही विवाह समारोह इसी शहर में था सो हम अधिक समय तो वहाँ नहीँ दे सके और तकरीबन एक-डेढ़ घंटे बाद वापस हो लिये, इस आशा के साथ कि पुन: भेंट होगी इन मित्रों से।

  20. लावण्या

    चिरँजीव बिटिया स्वाति व चि. निष्काम को आशिष
    व बधाई !
    ” अचल होही अहिवात तुम्हारा, जब लगि बहे गँग यमुन जल धारा ”
    आदरणीय डा.कन्हैयालाल नंदन जी आपके मामाजी हैँ ?
    सुनकर लगा, उन्हेँ भी प्रणाम कहती चलूँ -
    स – स्नेह,
    लावण्या

  21. अनिल

    आपका निमंत्रण पत्र श्री विनोद श्रीवास्‍तव जी के माध्‍यम से प्राप्‍त हुआ था और फोन पर आपसे मैंने आने क वादा भी किया था – पर आ नहीं पाया – वही पुराना बहाना कि आफिस में काम बहुत था – पर वास्‍तव में अखबार की नौकरी और अचानक आई आपात्‍कालीन स्थिति में फंसकर आ नहीं पाया – अपनी क्षमा याचना के साथ नव दम्‍पत्ति को मेरा यही आशीष है कि उनका दाम्‍पत्‍य जीवन हमेशा खुशियों से भरपूर रहे।
    अनिल सिन्‍हा

  22. जगदीश भाटिया

    नव दंपत्ति के मंगलमय जीवन हेतु शुभकामनाएँ!

  23. PRAMENDRA PRATAP SINGH

    हार्दिक शुभकामनाऐं।

  24. rachana

    दोनो‍ को हमारी ओर से भी शुभकामनाएं..

  25. गिरिराज जोशी "कविराज"

    वर-वधू को इस पुनीत अवसर पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ!!!

  26. अभिनव

    शुभकामनाएँ, चित्र देखकर अच्छा लगा।
    राकेशजी की पंक्तियाँ अद्भुत हैं, ऐसा लगा मानो हमारे ही मन की बात कह रही हों।

  27. ranjana

    वर-वधु को हार्दिक शुभकामनाएं

  28. neeraj dubey

    myriad congratulations over the nuptial tie.

  29. neeraj dubey

    dudho nahao puto falo

  30. फ़ुरसतिया-पुराने लेख

    [...] सदा रहे मंगलमय जीवन [...]

  31. ghanshyam

    बेटी को वाणी से संवार दे ऒ वीणा पाणि!
    शक्ति दे, शालीनता दे और संस्कार दे,
    लक्ष्मी तू भर दे घर उसका धन-संपदा से
    गणपति से कहकर सब संकट निवार दे!

    गौरी, तू शिव से दिला दे वरदान उसे
    दाम्पत्य पर अक्षत तरुणाई वार दे,
    मेरे सुख सपनों के सारे पुण्य ले ले मां तू ,
    अपने हाथों से उसकी झोली में डाल दे!

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