हिंदी विकि में लेखों की संख्या एक लाख के पार

हिंदी विकि में लेखों की संख्या एक लाख के पार

कुछ दिन पहले मितुल ने बताया कि हिंदी विकिपीडिया के लेखों की संख्या एक लाख से अधिक हो गयी है। मितुल चिट्ठों की दुनिया से जुड़े हैं। लेकिन शायद उन्होंने अपना ब्लाग आजतक नहीं बनाया। [मितुल का परिचय यहां देखें। ] शुरुआती दिनों में चिट्ठों पर मितुल की टिप्पणियां दिखतीं थीं लेकिन इधर काफ़ी दिनों [...]

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पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के साइड इफ़ेक्ट

पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के साइड इफ़ेक्ट

शायरों और न्यूज चैनलों में एक समानता होती है। दोनों किसी भी घटना को सबसे पहले बयान करने की बेकली से पीड़ित होते हैं! उनको लगता है कि अगर किसी घटना को सबसे पहले न दिखाया/बयान किया तो इतिहास उनको भले माफ़ कर दे लेकिन उनके पेशे का भूगोल बिगड़ जायेगा। पेट्रोल के दाम बढ़े [...]

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…और ये फ़ुरसतिया के सात साल

…और ये फ़ुरसतिया के सात साल

…..और मजाक-मजाक में हमारी चिट्ठाकारी के सात साल निकल लिये! कोई गड़बड़ नहीं भाई इसके पहले एक , दो ,तीन , और चार , पांच और छह भी निकले इज्जत के साथ! इन सात सालों के अनुभव मजेदार रहे। झन्नाटेदार भी। याद करते हैं कि विन्डॊ 98 के जमाने में, जयहनुमान सुविधा के सहारे, छहरी [...]

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मेरी यादों में डा.अमर कुमार

मेरी यादों में डा.अमर कुमार

डा.अमर कुमार पिछले हफ़्ते हमसे हमेशा के लिये विदा हो गये। उनको गये हफ़्ता होने को आया लेकिन यकीन नहीं होता कि वे अब हमारे बीच नहीं रहे। इस बीच उनकी कई पोस्टें पढ़ीं। उनकी टिप्पणियां पढ़ीं। उनका इंटरव्यू पढ़ा। हर बार ऐसा लगा कि यहीं किसी मोड़ पर वे आकर कुछ ऐसा टिपियायेंगे जिससे [...]

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अपना लक पहिन के चलो…

अपना लक पहिन के चलो…

ब्रिटेन में गई अपनी टीम इंडिया क्रिकेट वाली अभी जरा पिटन मोड में चल रही है। प्रेम से पिट रही है। हारे चली जा रही है। पहले तो बेचारी टीम इंडिया बड़ी परेशानी में थी। वो सोच रही थी कि इधर वह हार रही है उधर उसे देश में हचक के गालियां मिल रही होंगी। [...]

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भेरू दादा और पान की दुकान

भेरू दादा और पान की दुकान

यह पोस्ट इंदौर के सुनील पाटीदार की है। उन्होंने पिछली पोस्ट पर टिपियाया और मेल से अपना यह लेख भेजा। छापने के लिये। सुनील परसाई जी और शरद जोशी जी के प्रशंसक हैं। यह माह परसाई जी का जन्म माह है। इसलिये माह की शुरुआत परसाई प्रशंसक के ही लिखे से होने से बेहतर और [...]

नेकी कर, अखबार में डाल- आलोक पुराणिक

नेकी कर, अखबार में डाल- आलोक पुराणिक

करीब चार साल पहले आलोक पुराणिक का साक्षात्कार किया। उनका परिचय लिखते हुये लिखा गया था: आलोक पुराणिक [आलोक पुराणिक हिंदी व्यंग्य के जाने माने युवा लेखक हैं। गत दस वर्षों से व्यंग्य लेखन में सक्रिय आलोक पुराणिक से जब व्यंग्य लेखन के पहले के कामकाज के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला-'इससे पहले [...]

निष्ठुर समय में अकेला कवि!

निष्ठुर समय में अकेला कवि!

१. कविता लिखता आदमी दुनिया का सबसे मासूम आदमी होता है पवित्रमना, बांगड़ू! वह सोचता है- बस वही सोच रहा है इस तरह इसके पहले किसी और ने सोचा नहीं इस तरह! दुनिया में एक साथ करोड़ो लोग सबसे मासूम हो सकते हैं पवित्र और बांगड़ू भी बशर्ते वे सभी लिखने लगे कवितायें एक साथ [...]