बस यूं ही

आधुनिक होते समाज की बहुमुखी बर्बरता

आधुनिक होते समाज की बहुमुखी बर्बरता

कल हम लोगों ने अपना पैंसठवां गणतंत्र दिवस मनाया। देश भर में झण्डा फ़हराया गया। भाषण हुये। सांस्कृतिक कार्यक्रम हुये। संकल्प लिये गये कि हमें देश को आगे बढाना है। सबका उत्थान करना। समग्र विकास करना है। आदि-इत्यादि। कल गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के दौरान ही तमाम लोगों से बतकही का मौका भी मिला। तमाम […]

बिनु धरना सब सून

बिनु धरना सब सून

दो दिन पहले दिल्ली में धरना प्रदर्शन हुआ। माननीय मुख्यमंत्री ने दो दिन धरने पर बैठक उट्ठक लगायी। वहीं दफ़्तर लगाया। वहीं धरना किया। वहीं बयान दिया। वहीं समझौता वार्ता की। जहां से धरना शुरु किया वहीं खतम कर दिया। एक मुख्यमंत्री सिपाहियों के निलंबन के लिये दो दिन धरना रत रहे। आखिर में दो […]

दुनिया कित्ती खूबसूरत है

दुनिया कित्ती खूबसूरत है

अभी सुबह उठे। उठने के पहले जगे। जगे फ़िर उठे। देखा बाहर सूरज भाई अभी आये नहीं थे। सोचा आराम से आयेंगे। चाय मंगाई। पीते हुये टीवी देखते रहे। सब खबरें रिपीट हो रहीं थीं। ’रिपीट’ माने दुबारा पीट रहीं थीं। फ़िर बंद कर दिया टीवी। हल्ला कम हुआ कमरे में। ’सुकून’ बढा। ’शांति जी’ […]

सरकारी आवास पर आपत्ति पत्र

सरकारी आवास पर आपत्ति पत्र

पता चला कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने चुनावी वायदे के अनुसार नियमित सरकारी बंगले की जगह एक डुप्लेक्स में रहना तय किया। अखबारों में घर के फोटो छपे। फ़र्श खुदकर नयी बनने लगी। टाइलिंग का काम शुरु हो गया थी तब तक मीडिया और जनता में इसकी आलोचना होने लगी। विकट आलोचना के चलते दो […]

 काले धन के उजले पहलू

काले धन के उजले पहलू

काले धन की सब बुराई करते हैं। काले धन की मात्रा समाज में भ्रष्टाचार के समानुपाती होती है। जिस समाज में जितना ज्यादा करप्शन होता है उतनी ही आलोचना होती है बेचारे की। मानो भ्रष्टाचार कोई अपने से आता है और उसके प्रसार में किसी और दुनिया के लोगों का हाथ होता है। जैसे किसी […]

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