ओबामा जीते बवाल कटा

बराक ओबामा
बराक ओबामा

कल हम कल हम दिन भार दफ़्तर में बिजी रहे। शाम को आये तो पता चला कि ओबामा फ़िर से चुनाव जीत गये! अच्छा हुआ। बवाल कटा अमेरिकी चुनाव का।

इधर हमारी बहुत दिन बातचीत नहीं हुई ओबामा जी। होती तो भी क्या कहते वो? यही तो कि भाई साहब आपके आशीर्वाद से फ़िर से जीत गये। कोई काम हो तो बताइयेगा।

सुना है कि अमेरिका के चुनाव में बहुत पैसा, भाषण, लटके-झटके चलते हैं! पैसे वाली बिरादरी का इत्ता दखल है वहां राष्ट्रपति के चुनाव में कि किसी अमेरिकन लेखक के हवाले से ही परसाईजी ने कुछ इस तरह का लिखा था- अमेरिका में उद्योगपति किसी आदमी को पकड़कर राष्ट्रपति बना देते हैं।

ओबामाजी के चुनाव जीतने की हमें खुशी है। हमें ओबामा की जीत की खुशी है। अगर रोमनी जीतते तो उसके बारे में जानना पड़ता। उसके परिवार के बारे में भी। उसकी तमाम खूबियों के बारे में पढ़ना पड़ता। एक नोबले पुरस्कार उसको देना पड़ता। उनके बारे में तमाम किताबें छपतीं। तमाम कागज बच गया। हज्जारों पेड़ बचे। ओबामा की जीत से पर्यावरण की रक्षा हुई।

ओबामा की जगह अगर रोमनी जीतते तो रोमनी बहाने कई तरह की बहसें होती। अमेरिका बदल रहा है। दुनिया बदल रही है। रोमनी कैसे जीते। कौन उनका सलाहकार था। उनके भाषण किसने लिखे। उनका बचपन कैसा बीता। जवानी के क्या जलवे रहे। उन्होंने कैसे प्रपोज किया था। स्कूल में कैसे थे। उनका हस्तलेख कैसा है। उनकी तरह कौन लिखता है भारत। किस कलाकार के प्रसंशक हैं वे। न जाने कित्ती तरह के हेन-तेन किस्से सुनने पड़ते। साल निकल जाता यही सुनते-सुनते।

ओबामा हार जाते तो बुद्धिजीवी फ़िर से बहसियाते कि अमेरिका जनमानस मूलत: अल्पसंख्यक विरोधी, अश्वेत विरोधी ये विरोधी वो विरोधी है। न जाने क्या-क्या तुलना सुननी पड़ती।

तमाम लोग अमेरिका और भारत की तुलना करते हैं। यह एकदम असमान तुलना है। अमेरिका में चुनाव में दो उम्मीदवारों में से कोई एक चुना जाता है। भारत में चुनाव होने के तक तय नहीं हो पाता कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा। देश के किसी भी व्यक्ति को यह काम संभालने को कहा जा सकता है- ये भाई चलो , कसम खाओ पद और गोपनीयता की।

ओबामा का जीतना अच्छा ही है। वे अभी भी जवान दिखते हैं। झटका देकर बोल लेते हैं। मुट्ठी भींच लेते हैं। इसके बाद हाथ लहरा लेते हैं। भाषण के बाद अंगूठा दिखाकर मुस्करा लेते हैं। पत्नी और बच्चों का हाथ पकड़कर चल देते हैं। छुट्टी पर जा लेते हैं। मतलब सब तो है जो एक राष्ट्रपति बनने के लिये होना चाहिये।

क्रिकेट की भाषा में अगर कहा जाये तो ओबामा का राष्ट्रपति बनना इसलिये जायज है क्योंकि उनमें अभी बहुत राष्ट्रपतिता बची है।

इस बार तो जीतने के बाद ओबामा ने यह भी कह दिया – हम एक परिवार हैं। साथ जियेंगे। साथ मरेंगे। इस बयान को सुनने के बाद मुझे लगा शायद ओबामा जी ने इस बीच हिंदी सिनेमा देखा और दिल दिया है जान भी देंगे ऐ सनम तेरे लिये गाने से बहुत प्रभावित हैं। यह भी लगा कि जिसने भी ओबामा का भाषण लिखा है उसको जीने की उमंग के साथ मरने की आशंका भी सताने लगी है।

ओबामाजी का ये साथ जियेंगे, साथ मरेंगे वाला भाषण देखियेगा बहुत चलेगा। ये फ़िल्मी अंदाज में झटके में बोला भले गया हो लेकिन इसके गंभीर मतलब निकाले जायेंगे। साथ जियेंगे साथ मरेंगे को श्वेत-अश्वेत, बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक से जोड़ा जायेगा। इस डायलाग में कांट्रास्ट अलंकार है।

ओबामा दूसरी बार चुनाव जीते हैं। आखिरी बार जीते हैं। उनको शुभकामनायें देते हैं। इससे ज्यादा और एक आम भारतीय उनको दे ही क्या सकता है। वे भी हमारे देश के लोगों का ख्याल रखें। ज्यादा डराने वाले बयान जारी करके उनका रक्तचाप न बढ़ायें। ठीक है न!

15 responses to “ओबामा जीते बवाल कटा”

  1. विवेक रस्तोगी

    ये नये प्रकार के अलंकार के बारे में और बताया जाये :)
    विवेक रस्तोगी की हालिया प्रविष्टी..खोह, वीराने और सन्नाटे

  2. देवांशु निगम

    एक्को दिन सस्पेंस नहीं रख सकते हैं ई अमरीका वाले !!!

    भैया ठीक है वोट पड़े , पर कोई दावा भी नहीं करता की हम सरकार बनायेंगे | सीधे बन गए राष्ट्रपति !!! ऐसे कैसे !!! उनको मालूम नहीं है क़ि ये जो डेमोक्रेसी का त्यौहार है “चुनाव” इसे सेलिब्रेट कैसे करना है :) :) :)

    बधाई हमारी तरफ से भी | वैसे भी हिन्दुस्तानियों ( और खासकर आई टी वालों का) ख्याल तो ओबामा साहब ही रख सकते हैं | :) :) :)

    और हाँ ये नए अलंकार के बारे में जानने की इच्छा हमारी भी है :) :) :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..हैप्पी बड्डे टू मी !!!!

  3. sanjay jha

    ………
    ………

    प्रणाम.

  4. संतोष त्रिवेदी

    ओबामा के जीतने पर कांग्रेस मुख्यालय में समवेत-स्वर से गान…’जैसे उनके दिन बहुरे ,वैसे हमारे भी…!’
    संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..चींटी और हाथी !

  5. AKASH

    व्यंग्य भाषा का बखूबी इस्तेमाल | सबसे अच्छी “किसी भी व्यक्ति को यह काम संभालने को कहा जा सकता है- ये भाई चलो , कसम खाओ पद और गोपनीयता की।” लाइन लगी |
    :)

    सादर
    AKASH की हालिया प्रविष्टी..काश….

  6. यशवन्त माथुर

    कल 09/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    यशवन्त माथुर की हालिया प्रविष्टी..बदलते मौसम का असर नज़र आने लगा है……

  7. प्रवीण पाण्डेय

    चलिये कोई जीत गया, बहस बन्द हो गयी। हमारे यहाँ तो अन्तहीन सिलसिला चलता रहता है।

  8. Alpana

    बिलकुल सही आशा की है आप ने ओबामा जी से.
    वैसे उनके दिए भाषण को इतनी गंभीरता से भारतीय ‘ भी’ लेते हैं यह जानकार उन्हें तो आश्चर्य कतई नहीं होगा.
    शुभकामनाएँ अमेरिकियों और भारतवासियों को भी.
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..वो भी एक दौर था ..और ये भी….है !

  9. kajalkumar

    सही में बवाल कटा. टी वी अखबार वालों को मेला उठ गया.
    kajalkumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून:- ओबामा/अमरीका के चुनाव का दूसरा पहलू

  10. shikha varshney

    हाँ बवाल कटा ..यहाँ के अखबार भी खाली हुए कुछ .

  11. aradhana

    आपका जवाब नहीं. कहाँ-कहाँ तक नज़र पहुँच जाती है :) वैसे हमें लगता है कि जब हमें अपने देश में किसी के भी राष्ट्रप्रमुख होने से फर्क नहीं पड़ता, तो अमेरिका के राष्ट्रपति से क्या फर्क पड़ेगा :) हमें बस उतनी देर तक चिन्ता होती है, जितने दिन तक चुनाव की प्रक्रिया चलती रहती है. उसके बाद सब भूल जाते हैं.
    aradhana की हालिया प्रविष्टी..प्यार करते हुए

  12. Anonymous

    ओबामा हमसे भी कह रहे थे कि फुरसतिया जी के आशीर्वाद ने हमे जीता दिया… तनिक हम पर भी कृपा कीजिये…

  13. rajeev

    ओबामा हमसे भी कह रहे थे कि फुरसतिया जी के आशीर्वाद ने हमे जीता दिया… तनिक हम पर भी कृपा कीजिये…

  14. mahendra mishra

    यदि आपका उन्हें आशीर्वाद मिला तो वे अगले में राष्ट्रपति या राष्ट्रपिता जरुर बन जायेगें …. रोचक पोस्ट … आभार

  15. फ़ुरसतिया-पुराने लेख

    [...] ओबामा जीते बवाल कटा [...]

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