हर सफल ब्लागर एक मुग्धा नायिका होता है

ऐसा हमारे साथ पहली बार नहीं हुआ। होता है। अक्सर होता है।

तीन दिन से अफलातूनजी हमारे पीछे पडे़ हैं कि हम उनकी ब्लाग सम्मोहनी पोस्ट देखें, पढ़ें और उस पर टिपियायें।

जितना परेशान अफलातून भाई ने हमें अपनी पोस्ट पढ़वाने के लिये किया उतना तो शशिसिंह भी जीतेंन्दर चौधरी को इस बात के लिये नहीं करते कि लोकमंच को दुबारा मंच पर लाया जाये, न इतनी मेहनत ब्लागर लोग मोहल्ले को नारद से हटवाने के लिये करते हैं। अगर इससे आधी मेहनत पंगेबाज साथी मोहल्ले के खिलाफ़ कर लेते तो मोहल्ला तो मोहल्ला पूरा शहर बाहर हो जाता।

इसका मतलब यह कतई नहीं कि हम मोहल्ले के खिलाफ़ हैं। या हम पंगेबाज भाई की मेहनत को कम बता रहे हैं। हम तो बात बता रहे हैं कि अफलातूनजी ने बहुत मेहनत करी हमें अपनी पोस्ट को पढ़वाने के लिये।

हमने जब यह पोस्ट पढ़ी तो हमने पास में कोई और न होने के कारण अपना माथा ठोंक लिया। जो ये एन्ड्र्यू साहब कहिनहैं हम उससे आगे की बातें बहुत पहले कह चुके हैं। हमें अफलातूनजी पर भी बहुत झुल्ल सवार हुई। ये बातें समाजवाद, स्वदेशी, स्वभाषा प्रेम जैसी करते हैं लेकिन हरकतें एकदम उलट। जो बात हम डेढ़ साल पहले कह चुके वो एक अंग्रेज कहि दिहिस तो हमका दिखा रहे हैं कि देखो एन्ड्र्यू साहब कहिन हैं। ये कुछ ऐसे ही है जैसे कोई अमेरिका से इम्पोर्टेड हलदी दिखाने के लिये लाये और पैकेट पर लिखा हो मेड एट भन्नाना पुरवा, कानपुर पैक्ड इन अमेरिका।

एन्ड्र्यू जी कहा है कि चिट्ठेकारी का सम्मोहन लोगों में यकीन पैदा कर देता है कि उनके पास बताने के लिए काफ़ी कुछ है जो रुचिपूर्ण भी है , दरअसल ऐसा होता नहीं है ।लोग खुद से खुद के बारे में बतियाते-बतियाते आत्ममुग्धता के शिकार हो रहे हैं। सौन्दर्य शास्त्र में ऐसी स्थिति मुग्धा नायिका की होती है जो स्वयं के सौन्दर्य पर रीझती है। ऐसा ही ब्लागर के साथ भी होता है। हर ब्लागर के अंदर एक अदद मुग्धा नायिका रहती है। जो अपनी खूबसूरती पर फिदा होती है। कोई नायिका किसी से भी पूछे- बताओ मैं कैसी लग रही हूं तो किसी के पास भी -बहुत अच्छी, खूबसूरत कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। ऐसे ही अगर कोई ब्लागर अपनी पोस्ट दिखाता है तो बहुत अच्छा लिखा है से कम कुछ नहीं सुनना चाहता है। अगर उसने सुन भी लिया तो इसके बाद निश्चित तौर पर वह आपके खिलाफ़ राशन पानी लेकर चढ़ जाता है चाहे वह अनाम टिप्पणी के रूप में हो या अनाम ब्लाग के रूप में।

बहरहाल हम यही कहना चाहते हैं कि एन्ड्र्यूजी ने केवल मर्ज बताया कि ब्लागर आत्ममुग्ध हो जाते हैं। हमने मर्ज भी बताया और उसका इलाज भी। दर्द के साथ दवा मुफ़्त। हमने कहा था- अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अपना अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है। मतलब ब्लाग मुग्धावस्था एकमात्र उपाय यह है कि आप ब्लाग लिखना बंद कर दें।

लेकिन यह सब अफलातूनजी को नहीं दिखा। वे अटक-अटक के अंग्रेजी में वही बात पढेंगे और दुनिया को बतायेंगे लेकिन वही बात जो बहुत पहले हिंदी में कही जा चुकी है वो नहीं देखेंगे। ऐसा होता है। योग के प्रचार-प्रसार के लिये उसका योगा होना और राग के जलवे के लिये उसका रागा होना बेहद जरूरी है।

बहरहाल, इतना लिखते-लिखते हमारे अंदर की मुग्धा नायिका अलसाती अंगड़ाई लेती हुयी उठ खड़ी हुयी। हम अपनी एक पोस्ट को दुबारा देखने लगे। इसमें मैंने ब्लाग, ब्लागर, ब्लागिंग पर कुछ सुभाषित लिखे थे। इनको रविरतलामीजी ने झन्नाट कहा था। मुग्धा नायिका जितनी बार दर्पण में अपना सौन्दर्य देखकर रीझती है उतनी बार थोड़ी क्रीम, पाउडर और पोत लेती है। इसी तरह हमने इसमें कुछ सुभाषित और जोड़े हैं। आप इनको देखें-

१.ब्लाग दिमाग की कब्ज़ और गैस से तात्कालिक मुक्ति का मुफीद उपाय है।

२.ब्लाग पर टिप्पणी सुहागन के माथे पर बिंदी के समान होती है।

३.टिप्पणी विहीन ब्लाग विधवा की मांग की तरह सूना दिखता है।

४.अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है।

५.अनावश्यक टिप्पणियों से बचने के लिये किये गये सारे उपाय उस सुरक्षा गार्ड को तैनात करने के समान हैं जो शोहदों से किसी सुंदरी की रक्षा करने के लिये तैनात किये जाते हैं तथा बाद में सुरक्षा गार्ड सुंदरी को उसके आशिकों तक से नहीं मिलने देता।

६.जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।

७.किसी पोस्ट पर आत्मविश्वासपूर्वक सटीक टिप्पणी करने का एकमात्र उपाय है कि आप टिप्पणी करने के तुरंत बाद उस पोस्ट को पढ़ना शुरु कर दें। पहले पढ़कर टिप्पणी करने में पढ़ने के साथ आपका आत्मविश्वास कम होता जायेगा।

८.अगर आपके ब्लाग पर लोग टिप्पणियां नहीं करते हैं तो यह मानने में कोई बुराई नहीं है कि जनता की समझ का स्तर अभी आपकी समझ के स्तर तक नहीं पहुंचा है। अक्सर समझ के स्तर को उठने या गिरने में लगने वाला समय स्तर के अंतर के समानुपाती होता है।

९.जब आप किसी लंबी पोस्ट को बाद में इत्मिनान से पढ़ने के लिये सोचते हैं तो उस पोस्ट की हालत उस अखबार जैसी ही होती है जिसे आप कोई अच्छा लेख पढ़ने के लिये रद्दी के अखबारों से अलग रख लेते हैं लेकिन समय के साथ वह अखबार भी रद्दी के अखबारों में मिलकर ही बिक जाता है-अनपढ़ा।

१०.जब आप कोई टिप्पणी करते समय उसे बेवकूफी की बात मानकर ‘करूं न करूं’ की दुविधा जनक हालत में ‘सरल आवर्त गति’ (Simple Hormonic Motion) कर रहे होते हैं उसी समयावधि में हजारों उससे ज्यादा बेवकूफी की टिप्पणियां दुनिया की तमाम पोस्टों पर चस्पाँ हो जाती हैं।

११.अगर आपके ब्लाग का जलवा पूरी दुनिया में फैला हुआ है तथा कोई आपकी आलोचना करने वाला नहीं है तो यह तय है कि या तो आपने अपने जीवनसाथी को अपना लिखा पढ़ाया नहीं या फिर जीवनसाथी को सुरक्षा कारणों से पढ़ने-लिखने से परहेज है।

१२. अगर आप अपने जीवन साथी से तंग आ चुके हैं तथा उससे निपटने का कोई उपाय आपको समझ में नहीं आ रहा तो आप तुरंत ब्लाग लिखना शुरु कर दीजिये।

१३.नियमित,हरफनमौला तथा बहुत धाकड़ लिखने वाले ब्लाग पढ़ने के बाद अक्सर यह लगता है कि ‘लिंक लथपथ’ यह ब्लाग पढ़ने से अच्छा है कि कोई अखबार पढ़ते हुये कोई बहुत तेज चैनेल क्यों न देखा जाये।

१४.’कामा-फुलस्टाप’,'शीन-काफ’ तक का लिहाज रखकर लिखने वाला ‘परफेक्शनिस्ट ब्लागर’ गूगल की शरण में पहुंचा वह ब्लागर होता हैं जिसने अपना लिखना तबतक के लिये स्थगित कर रखा होता है जब तक कि ‘कामा-फुलस्टाप’ ,’शीन-काफ’ को ‘यूनीकोड’ में बदलने वाला कोई ‘साफ्टवेयर’ नहीं मिल जाता।

१५.अनजान टिप्पणियां अक्सर खुदा के नूर की तरह होती हैं जो आपको तब भी राह दिखाती हैं जबकि आप चारो तरफ से प्रशंसा के कुहासे में घिरे होते हैं।

१६. अगर आप अपने ब्लाग पर हिट बढ़ाने के लिये बहुत ही ज्यादा परेशान हैं तो तमाम लटके-झटकों का सहारा छोड़कर किसी चैट रूम में जाकर उम्र,लिंग,स्थान की बजाय अपने ब्लाग का लिंक देना शुरु कर दें।

१७.अगर आप अपना ब्लाग बिना किसी अपराध बोध के बंद करना चाहते हैं तो किसी स्वनाम धन्य लेखक को अपने साथ जोड़ लें।

१८. अच्छा लिखने वाले की तारीफ करते रहना आपकी सेहत के लिये भी जरूरी है। तारीफ के अभाव में वह अपना ब्लाग बंद करके अलग पत्रिका निकालने लगता है। तब आप उसकी न तारीफ कर सकते हैं न बुराई।

१९.ऊटपटांग लिखने वाले का अस्तित्व आपके बेहतरीन लिखने का खुशनुमा अहसास बनाये रखने के निहायत जरूरी है। घटिया लिखने वाला वह नींव की ईंट है जिसपर आपका बढ़िया लिखने के अहसास का कगूंरा टिका होता है।

२०. बहुत लिखने वाले ‘ब्लागलती’ को जब कुछ समझ में नहीं आता तो वह एक नया ब्लाग बना लेता है,जब कुछ-कुछ समझ में आता है तो टेम्पलेट बदल लेता है तथा जब सबकुछ समझ में आ जाता है तो पोस्ट लिख देता है। यह बात दीगर है कि पाठक यह समझ नहीं पाता कि इसने यह किसलिये लिखा!

२१. जब आपका कोई नियमित प्रशंसक,पाठक आपकी पोस्ट पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करता तो निश्चित मानिये कि वो आपकी तारीफ में दो लाइन लिखने की बजाय बीस लाइन की पोस्ट लिखने में जुटा है। उन बीस लाइनों में आपकी तारीफ में केवल लिंक दिया जाता है जो कि अक्सर गलती संख्या ४०४(HTML ERROR-404) का संकेत देता है।

२२. जब कोई ब्लागर अपना ब्लाग बन्द करने की धमकी देता है तब यह समझ लेना चाहिये कि वह नियमित लेखन के लिये कमर कर चुका है।

२३. अगर आपके ब्लाग पर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं तो आप अपने ब्लाग पर कोई विवादास्पद बहस शुरू कर दीजिये। अधिक ध्यान आकर्षित करने के लिये भाषा आक्रामक कर लीजिये। खुद यह सब न कर पा रहे हों तो छंटे हुये लोगों से करवाने लगिये।

२४. आपके विरोध में नियमित लिखने वाला ब्लागर आपके लिये बिना पैसे का प्रचारक है।

२५. किसी साझा मंच के बारे में सबसे अधिकार पूर्वक बयान वे लोग देते हैं जिनका उस मंच से कोई ताल्लुक/जुड़ाव नहीं होता।

२६. ब्लाग जगत में सारे सार्वजनिक मंच रेलवे प्लेटफार्म की तरह होते हैं। जहां लोग वे सारे कार्यव्यापार करते हैं जो वे कभी भी अपने ब्लाग पर नहीं करना चाहते।

२७. लोगों को मनमानी करने के आरोप में निकाल बाहर करने वाले वे लोग होते हैं जो खुद अपने साथ मनमानी किये जाने का रोना रोते रहे हैं।

२८. किसी बेसिरपैर की बात को जो जितने अधिक विश्वास से कह सकता है वह उतना ही सफल ब्लागर होता है।

२९. तमाम छोटी-मोटी ऐं-वैं टाइप पोस्टें सड़क पर बिखरी उन कीलों की तरह होती हैं जो किसी बड़े से बड़े ब्लाग-टायर की हवा निकाल देती हैं।

३०. अगर आप निराकार ईश्वर के बारे में कुछ समझने की प्रयास करते-करते थक चुके हैं और आपको उसके बारे में कुछ अहसास नहीं हुआ तो आप अनाम ब्लागर के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दीजिये। निराकार ईश्वर की तरह वह सब जगह है और कहीं नहीं है। घट-घट में भी है और पनघट में भी।

३१. ब्लाग जगत की सेहत को लेकर चिंता करने वाले और उसको नियंत्रित करने वाले के प्रयास उस टिटिहरी के प्रयास की तरह होते हैं जो पैर उलटा करके इसलिये सोती है कि जब आकाश गिरेगा तो वह उसे थाम लेगी।

३२. जब किसी लेखक को कोई विषय नहीं सूझता तो वह संस्मरण लिखने लगता है। संस्मरण में अपने कामों का बखान करते हुआ ब्लागर इतना बांगडू लगता है कि किसी का भी मन उसकी तारीफ़ करके आगे बढ़ने का करने लगता है।

३३.आपका ब्लाग आपके व्यक्तित्व का आइना होता है। जैसे-जैसे आपका व्यक्तित्व चौपट होता जाता है वैसे-वैसे आपको धुंधले आइने पसंद आने लगते हैं-साफ आइने में चेहरे भी नजर आते हैं साफ/ धुंधला चेहरा हो तो धुंधला आइना चाहिये। -वाहिद शाहजहांपुरी

३४. किसी सर्वज्ञानी ब्लागर के ज्ञान बोध और हास्य बोध में हमेशा ३६ का आंकड़ा होता है।

३५. अगर आपसे अनियमित बात करने वाला कोई ब्लागर आपसे बिना किसी काम के नमस्ते करता है तो समझ लीजिये कि अगले संदेश में वह आपको अपने सबसे नये लेख की कड़ी देने वाला है। इसके बाद अगर फिर वह आपको नमस्ते करता है तो इसका मतलब वह टिप्पणी का तकादा करने वाला है। इस तरह के हमलों से बचने का सबसे मुफ़ीद उपाय यही है कि आप किसी भी नमस्ते के जवाब में अपने नयी-पुरानी, ऐसी-वैसी पोस्ट का लिंक थमाने की आदत डाल लें। नमस्ते तो होते रहते हैं।

३६. जैसे हर नया लेखक कालजयी होता है वैसे ही हर ब्लागर जिसके बारे में अखबारों में छपता है वह हिंदी का पहला ब्लागर होता है। जो ब्लागर अखबार में जहां खड़ा हो जाता है लाइन वहीं से शुरू हो जाती है। अब यह अलग बात है कि जितने ब्लागर होते हैं उतनी ही लाइनें होती जाती हैं।

अगर आप इतना पढ़ ही चुके हैं तो यह भी बताते जाइये न कि यह लेख कैसा लगा? बताइये हम अपने तक रखेंगे ,किसी को बतायेंगे नहीं!

60 responses to “हर सफल ब्लागर एक मुग्धा नायिका होता है”

  1. संतोष त्रिवेदी

    सारे के सारे हिट और अनुभूत फार्मूले हैं !

    जय हो !
    संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..ब्लॉगिंग के साइड-इफेक्ट !

  2. arvind mishra

    अब ये ३६ क्यों हैं ? १०० करना था न या पचास या फिर ३२ ही पर छोड़ दिए होते महराज ….जैसे सिंहासन बत्तीसी वैसे …….हा हा हा ..अब इतना समझदार तो हैं ही आप ….
    बहरहाल जोरदार ही नहीं बहुतै जोरदार है -निचोड़ कहिये ब्लॉग जीवन का!
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..Test Post

  3. Padm Singh पद्म सिंह

    हे प्रभु…. आपने तो सारा निचोड़ कर रख दिया… … हजार ठोकरें खाने के बाद ही तो पत्थर शंकर जी बनता है .
    Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..गज़ल

  4. सतीश चंद्र सत्यार्थी

    चार और लिख देते तो पूरा ‘ब्लॉग चालीसा’ हो जाता… ;)
    समाज सुधार और विश्व-कल्याण जैसे महान उद्देश्यों को लेकर ब्लॉगिंग करने वालों पर भी कुछ लिखना था.. बेचारे निराश होंगे…
    सतीश चंद्र सत्यार्थी की हालिया प्रविष्टी..टर्किश लैंगुएज सेल्फ स्टडी – तुर्की भाषा अल्फाबेट

  5. amit srivastava

    कुछ लोग तो बस तलाशते रहते हैं , कहीं कोई सुनसान ब्लॉग मिले तो फ़ौरन उसकी मांग अपनी टिप्पणी से भर दें और फिर उस सूनी मांग का पहला पहला सिन्दूर कहलाने का मौक़ा मिले |
    amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." बहुत कठिन है डगर …….ब्लागिंग की …….."

  6. राजेन्द्र अवस्थी

    वाह वाह वाह आदरणीय, उत्तम अतिउत्तम अतिउत्तम……आपके सारे झन्नाट बड़े ही ज्ञानवर्धक और उत्साहित करने वाले हैं…आशा है भविष्य में कुछ और परिमार्जित झन्नाट बाँचने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

  7. mahendra mishra

    अभी समयाभाव के कारण आधा पढ़ लिया है कई बिंदु बहुत सटीक लगे …. आभार

  8. mahendra mishra

    यदि सफल ब्लागर नायिका के समान तो असफल ब्लॉगर खलनायक के समान …..

  9. roushan

    pata chal gaya ki aap safal blogger hain ye bhi pata chal gaya ki kyon aur kaise

  10. : पर स्टेटस कुशल बहुतेरे

    [...] 2.जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।-ब्लागिंग के सूत्र [...]

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