झापड़ ही तो मारा है…


यह मैंने कल अपनी आंखों से देखा।

एक लड़का सड़क पर जा रहा था। भीड़ बहुत थी। ट्रैफिक देश की प्रगति की रफ़्तार सा। ठहरा था। पीछे से आई कार ने उसे छुआ सा होगा। उसने कुछ कहा। शायद कार के बंद शीशे पर हाथ भी मारा। अंदर से कार वाला निकला। बाहर वाले बच्चे को थुर दिया। तीन-चार कन्टाप धर दिये। बोला भी- साले सड़क पर चलने की तमीज नहीं। पिटने वाले लड़के ने प्रतिवाद करने का प्रयास किया। तब तक लोगों बीच-बचाव करके अलग कर दिया। सबको जल्दी थी। सब चाहते थे सड़क खाली हो, वे घर पहुंचे। लड़का मन -मसोस कर चला गया। गाल सहलाता। पता नहीं ये झापड़ उसके जीवन में क्या रंग लायेंगे आगे? लेकिन ला सकते हैं।

दो दिन पहले हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थपड़िया दिया। श्रीसंत रोने लगे। युवराज सिंह ने शिकायत कर दी। बात आगे बढ़ी और अब जांच शुरू हो गयी। फ़ारुख इंजानियर मामले की जांच करेंगे । वीडियो देखेंगे। हरभजन की सजा तय करेंगे।

हम तब से सोच रहे हैं इस सारे मसले पर।

श्रीसंत कहते हैं -हरभजन उनके बड़े भाई के समान हैं। जो मारा था वो झापड़ नहीं था दर असल वो गलत जगह हाथ मिलाने के समान हो गया। मतलब हरभजन अपने छोटे भाई से हाथ मिला रहे होंगे तेजी से, सामने गाल आ गया। अब हाथ में ब्रेक तो लगा नहीं होता। जड़त्व के आधीन बेचारा गाल से मिल गया।

श्रीसंत कहते हैं- वे इस मामले में शिकायत न करेंगे।

हरभजन कहते हैं- उनका मामला निपट गया है।

दोनों भाई आपस में निपट लिये लेकिन दुनिया वाले जांच पर आमादा हैं। भाई-भाई के बीच दरार डालने का काम कर रहे हैं। दीवार खड़ी कर रहे हैं। दरार पैदा कर रहे हैं। लोगों से दूसरों का प्रेम देखा नहीं जाता। जलते हैं।

अपने यहां संयुक्त परिवारों में प्रेम प्रकट करने के कुछ तरीकों में यह तरीका बहुत चलन में था। जिससे बहुत प्यार करते हैं उसकी गाहे-बगाहे पिटाई करते रहो। गाल पर झापड़ मारना प्यार की मोहर लगाने के समान होता था। बाप-बेटे में अक्सर इसी प्रेम का चलन था। बड़े भाई -छोटे भाई भी बिना कापी राइट की चिंता किये इसे अपनाते रहे। हरभजन और श्रीसंत अपनी उज्ज्वल पारिवारिक परंपराओं से जुड़ने का प्रयास करते हैं तो दूसरों को क्यों जलन हो?

अक्सर बात होती है- ऐसा हुआ तो क्यों हुआ। आइये आपके साथ मिलकर सोचते हैं। हरभजन ने श्रीसंत को झापड़ क्यों मारा?

एक तो जो कारण बताया गया कि हरभजन अपनी टीम की लगातार हार से बौखलाये थे। उसके बाद श्रीसंत ने कुछ हरकत की तो टीम प्रेम के वशीभूत होकर उनका भ्रातृप्रेम उमड़ आया। छलक पड़ा।

लेकिन पिछले रिकार्ड से यह बहाना मनगड़न्त लगता है। हमने तमाम बार देखा है कि जब टीम हार रही होती है। सारे देश की क्रिकेट प्रेमी धर्मभीरू जनता जीत के लिये या हार बचाने के लिये भजन-कीर्तन-प्रसाद मनौती में जुटी रहती है तब भी ये धुरंधर खिलखिलाते दिखते हैं। एक दूसरे पर गिरते-पड़ते, लस्टम-पस्टम होते दिखते हैं। सो हार से संतुलन खोना हमारे खिलाडियों की फ़ितरत में है- यह सही नहीं लगता। वे जीत-हार से बहुत ऊपर उठ गये हैं।

दूसरे कारणों में मुझे लगता है कि शायद चीयरलीडरानियों का रोल भी हो इस मामले में। देश के तमाम दूसरे लोगों की तरह हरभजन भी क्रिकेट में चीयरलाडरानियों की उपस्थिति से खफ़ा-खफ़ा हों। श्रीसंत और हरभजन खुद यह मटकने-लटकने का काम करते रहे हैं। प्रतिस्पर्धी के आने से वे बौखलाये हों। श्रीसंत को देखकर उनकी बौखलाहट सामने आ गयी। श्रीसंत अपनी टीम की जीत से मटकने लगे होंगे। उन्होंने चीयरबालाओं वाला गुस्सा उन पर उतार दिया होगा।

हो तो यह भी सकता है कि शायद चीयरलीडरानियां उनको ज्यादा ही भाती हों। उन्होंने ही शायद भज्जी से कहा हो, भाईसाहब, अगर ये श्रीसंत हमारा काम करेंगे तो हमको कौन पूछेगा? हरभजन ने श्रीसंत को ठीक कर देने का आश्वासन दिया होगा। और कर भी दिया।

हो सकता है कि क्रिकेट में सट्टा लगा हो कि आज भी कोई फ़न्नी हरकत की जायेगी। उसी के चलते किसी ने हरभजन को उकसाया हो- आज श्रीसंत के गाल पर भांगड़ा कर दो। भज्जी ने कर दिया होगा।

लोगों ने बेवजह तूल दे दी। वर्ना शायद हरभजन गाना भी गाते-

हंगामा है क्यूं बरपा,
झापड़ ही तो मारा है,
चोरी तो नहीं की है,
डाका तो नहीं डाला।

बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। पता चलेगा लोग किसी को पीट देंगे और कहेंगे वे क्रिकेट खेल रहे थे। बच्चे दोस्तों को मुंह बिरायेंगे- तू क्या क्रिकेटर बनेगा? कायदे से झापड़ मारना तो आत नहीं। ऐसा होगा भाई। महाजनों एन गत: स: पन्था का सूत्र यही कहता है। भज्जी महान खिलाड़ी हैं। गाल पर हाथ मिलाते हैं। :)

अखबार से पता चला कि भज्जी उग्र स्वभाव के बहुत पहले से हैं। जब वे पेश अकादमी में क्रिकेट सीखने गये तो घर से दूर होने के कारण तमाम शरारतें करते थे। कई पेस बालरों के बीच वे अकेले क्रिकेटर थे। इसी अकेलेपन और घर से दूरी के कारण वे उग्र बनते गये। बचपन का अभाव और अकेलापन कितनी दूर तक असर करता है। देखिये।

दुनिया के जितने खुराफ़ाती रहे हैं उनके खुराफ़ात की जड़ में बचपन की कोई न कोई कमी रही है।

भज्जी तो चर्चित खिलाड़ी हैं। उनका झापड़बाजी पर देश लफ़्फ़ाजी कर रहा है।

वह बच्चा जिसका जिक्र मैंने शुरुआत में किया जो कारवाले से पिटकर घर चला गया उसका क्या होगा?

उसके गाल पर पड़ा झापड़ क्या गुल खिलायेगा?

क्या कुछ कहा जा सकता है?

15 responses to “झापड़ ही तो मारा है…”

  1. abha

    श्रीसंत , हर भजन की कथा तो हम सुन ही रहे हैं , जहां तक थप्पड खाए बच्चे की बात है -या तो आदि हो जाएगा या कुछ न कुछ गुल खीलाएगा ही

  2. Gyandutt Pandey

    हरि का भजन करते तो सद्वचन निकलते। हर (शंकर) के भजन में तो ताण्डव ही होगा।
    बाकी इन लंगूरों और लंगूरों के खेल को क्या तवज्जो दी जाये! :-)

  3. आलोक

    भज्जी ने खूब मार खाई होगी कार वालों से बचपन में।

  4. Shiv Kumar Mishra

    थप्पड़ काण्ड के कारणों बारे में कुछ कयास…

    ०१. चीयरलीडरनियों के वस्त्रों को लेकर थोड़ा झमेला हो गया था. इस बात से आई पी एल की टी आर पी गिराने के आसार थे. हरभजन जी ने टी आर पी में संभावित गिरावट को रोकने के लिए ये थप्पड़ प्रदान किया. ऐसा सुनने में आ रहा है.

    ०२. हरभजन का कोई छोटा भाई नहीं है. वे छोटे भाई की तलाश में क्रिकेट खेल रहे थे. वहीं श्रीसंत जी को बड़े भाई की तलाश थी. ये थप्पड़ कार्यक्रम इसी तलाश का नतीजा है.

    ०३. क्रिकेट को और मनोरंजक कैसे बनाया जाय. ये बी सी सी आई की नीति के तहत किया गया कार्यक्रम है.

  5. kakesh

    हमें भी आपके मारे थप्पड़ या आ रहे हैं. अब समझा उन थप्पड़ों का महत्व.

  6. आलोक पुराणिक

    बड़े भाई हैं हरभजन, ऐसा संत ने बताया।
    भाई तो टपकाते हैं, पर हरभजन ने सिर्फ चांटे पर निपटाया।
    ये ना समझें कि अबका क्रिकेट विकट बेहया है
    हरभजन ने सिर्फ चांटा लगाया यानी कित्ती दया है।
    जमाये रहिये।
    चांटा नहीं,
    ब्लाग।

  7. आलोक पुराणिक

    बड़े भाई हैं हरभजन, ऐसा संत ने बताया।
    भाई तो टपकाते हैं, पर हरभजन ने सिर्फ चांटे पर निपटाया।
    ये ना समझें कि अबका क्रिकेट विकट बेहया है
    हरभजन ने सिर्फ चांटा लगाया यानी कित्ती दया है।
    जमाये रहिये।
    चांटा नहीं,
    ब्लाग।

  8. vijaygaur

    अच्छा आलेख है, कई सवाल छेडता है. कार वाले से थप्पड खाये लडके और श्री संत में बेशक कोई साम्य न हो {वर्गीय कारणों से पर} पर हरभजन सिंह के सामने तो श्री संत भी वही सड्क का लडका नजर आ रहा है.

  9. दिनेशराय द्विवेदी

    लगता है, भज्जी गलत खेल में घुस लिए। इन्हें तो खली के साथ होना चाहिए।

  10. siddharth

    झापड़ काण्ड का यह विवेचन मजेदार है। खेल में व्यापारियों की घुसपैठ जिस तरह से हावी हो रही है और जितना बड़ा पैसा involve है, अभी बहुत लत्तम्-जुत्तम् और जूतम्-पैजार देखने को मिलेगी। बस देखते जाइये।

  11. नितिन

    दुखद है लाइफ बैन लगता तो शायद ठीक होता!

    वैसे बाजार की उम्मीदों पर बिलकुल खरा उतर रहा है ये खेल – इसमें रोमांस है, ड्रामा है, इमोशन है, ट्रेजेडी है।

  12. समीर लाल

    कुछ बातें सामने आ गई हैं अब तो:

    -भज्जी ने बचपन में कारवालों से खूब झापड़ खाये हैं.
    -श्रीसंत बचपन में मार खा लेते तो आज लोगों को नहीं चिढ़ाते. तब कोई डांटता नहीं और वो गाली नहीं बकता तो कोई मारता भी नहीं. (अर्थात क्रिया की प्रतिक्रिया में बचाव हो सकता था)

    -श्रीसंत ने साबित कर दिया कि सिर्फ महिलाऐं ही आँसू से जंग नहीं जीता करतीं, वह भी जीत सकते हैं और जीत ही गये.

    -झापड़ मारने से रिश्ते कायम हो जाते हैं (बड़े भाई-छोटे भाई वाले)

    -फारुख इंजिनियर झापड़ को लापड़ बोलकर हंसते हैं कि कैसा मारा.

    -पीटने वाले से ज्यादा साहनभूति पिटने वाले के साथ होती है यह बात भज्जी ने गाँठ बाँध ली है. आगे से अपने बॉलिंग और बैटिंग में इस बात का ध्यान रखेंगे.

    आदि आदि..

    –बाकी आप लिखे बहुते चकाचक हैं..अब तो भज्जी सजा पा गये. बड़ा मंहगा और करारा झापड़ था. :)

  13. जीतू

    पेश है आईपीएल: रोमांस, रोमांच, एक्शन, संस्पेंस,सेंसेशन और ढेर सारे लटके झटकों से भरपूर। इसमे आइटम सांग है, आइटम गर्ल्स है, छक्के(वो वाले नही) और चौके है। पूरे परिवार का भरपूर मनोरंजन। आपके पैसों की भरपूर अदायगी। इसको देखने के बाद आप अपने आपको चीटेड महसूस नही करेंगे। हर हफ़्ते नया एपीसोड:
    पिछला एपीसोड : चीयरलीडरनियां – To be (more Sexy) or not to be

    आज का ड्रामा(पिछला वाला): तीन करोड़ का थप्पड़

    अगला ड्रामा : देखते रहिए…

    कुल मिलाकर लब्बो लुबाब: बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा….टीआरपी बड़ती रहे, दुनिया जले तो जलती रहे।

  14. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176

    [...] झापड़ ही तो मारा है… [...]

  15. नीरज दीवान

    आज वाला भी सटीक रहा.. श्रीसंत ने क्रिकेट को तमाचा मारकर बदला ले लिया।

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