37 responses to “कौन कहता है बुढ़ापे में इश्क का सिलसिला नहीं होता”

  1. seema gupta

    “ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha haaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaनखरे किसके चाहें उठाना ,वो धरता सैंडिल की नोक
    जो मिलने की रखे तमन्ना, उसे दूर ये देते फेंक।
    ha ha ha jvab nahee….”

    regards

  2. दिनेशराय द्विवेदी

    जवानी बीती इक दूजे की मुस्कें कसते ,
    सउर परेम का बुढ़ापे में आय।

    हैं धन्य, हों न जो फुरसतिया
    ब्लागिंग में परेम जाय बिसराय

    दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ।
    दीवाली आप और आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए।

  3. Ghost Buster

    हर चीज का होता है बुरा हाय बुढ़ापा,
    आशिक को तो अल्लाह ना दिखलाये बुढ़ापा.

  4. विवेक सिंह

    सुमिरन करके टिप्पणीश्वर कौ करके वीर निठल्ला याद .
    ब्लॉगर भाई और भाभियाँ सबसे करता हूँ फरियाद ..
    निन्दा करके इस कविता की दो रैली को सफल बनाय .
    कूडाकरकट नहीं चलेगा अनूप शुक्ला हाए हाय ..
    हा हा ही ही करते रहते कबऊ सीरियस होते नाय .
    पोस्ट आजकल खुद न लिखें ये जाने किससे लेत लिखाय ..
    सीदा सादा गद्य लिखें बस कविता जब आती ही नाय .
    बुरा मानते हों तो मानें हमको ना कोई डर भाँय ..

  5. Abhishek Ojha

    इ तो ‘प्रेम कम वीर रस’ का पुराण हुई गवा है. लेकिन ये लाइने बड़ी मजेदार लगी मुझे:

    इतनेव पर बस करै इशारा, इनका गूंगा देय बनाय
    दिल धड़कावै,हवा सरकावै ,पैंटौ ढीली देय कराय।
    उचकि के बैठे लैपटाप पर बत्ती सारी लिहिन बुझाय,
    मैसेंजर पर ‘बिजी’ लगाया,आंखिन ऐनक लीन लगाय।
    सुमिरन करके मातु शारदे ,पानी भौजी से मंगवाय
    खटखट-खटखट टीपन लागे उनसे कहूं रुका ना जाय।
    तारीफन के गोला छूटैं, झूठ की बमबारी दई कराय
    न कोऊ हारा न कोऊ जीता,दोनों सीना रहे फुलाय।
    ये हैं धरती के सच्चे प्रतिनिधि तंबू पोल पर लिया लगाय,
    कन्या रखी विपरीत पोल पर, गड़बड़ गति हो न जाय।

    दुबारा-तिबारा पढ़ी… कमाल का है प्रेम आल्हा.

  6. ताऊ रामपुरिया

    तारीफन के गोला छूटैं, झूठ की बमबारी दई कराय
    न कोऊ हारा न कोऊ जीता,दोनों सीना रहे फुलाय।

    इनकी बातैं इनपै छ्वाड़व अब कमरौ का सुनौ हवाल,
    कोना-कोना चहकन लागा,सबके हाल भये बेहाल।

    लाजवाब मौज है शुक्ल जी ! तबियत हरी कर दी आपने !
    दीपावली की परिवार व मित्रो सहित आपको हार्दिक शुभकामनाएं !

  7. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    बहुत सुन्दर।
    इसका सस्वर पाठ पोस्ट होना चाहिये। आप न कर सकें तो समीरलाल जी को कह दें। आपकी बात का कभी मना नहीं करते वे!
    भले मित्र का यही लाभ है।

  8. सतीश सक्सेना

    वाह वाह ! क्या मस्ती है, दीपावली पर होली के रंग में दिख रहे हो अनूप भाई ! शुभकामनायें !

  9. manvinder bhimber

    दीप मल्लिका दीपावली – आपके परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ दीपावली एवं नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

  10. parul

    दीपावली मंगलमय हो!!!

  11. Shiv Kumar Mishra

    बूढ़न के इश्कन की किहनी पढि-पढि के बस हँसते जाय
    हँस-हँस कर अब लोटिपोट भय, मन बोला कि अब टिपियाय

    मौज का कौनो लिमिट नाही है.
    दीपावली की शुभकामनाएं.

  12. कविता वाचक्नवी

    साहित्य में आजकल विधाओं के फ़्यूज़न का युग है, पर आपने तो रसों का ही फ़्यूज़न कर दिया ? वैसे शोध प्रबन्ध का वही प्रेमाख्यान काव्यों वाला अध्याय ही चल रहा है, उसके कालविभाजन में भी आपने शायद अलग अलग आयुवर्ग की विवेचना और विश्लेषण वाला अध्याय, क्रम में आगे रखा है।
    प्रबन्ध की सफलता की शुभकामनाएँ।

  13. अशोक पाण्‍डेय

    ****** परिजनों व सभी इष्ट-मित्रों समेत आपको प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्‍मी से प्रार्थना होनी चाहिए कि हिन्‍दी पर भी कुछ कृपा करें.. इसकी गुलामी दूर हो.. यह स्‍वाधीन बने, सश‍क्‍त बने.. तब शायद हिन्‍दी चिट्ठे भी आय का माध्‍यम बन सकें.. :) ******

  14. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'

    फिर से पढ़ा..पिछली बार जैसा ही आनन्द पुनः हो आया. वाह! वाह!! निकल पड़ा.

    दीपावली के इस शुभ अवसर पर आप और आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  15. Dr .Anurag

    …अति चुम्बनीय पोस्ट !

  16. - लावण्या

    ” दिव्य कहानी दिव्य प्रेम की जो कोई सुनै इसे तर जाय । ”

    आपको भी लक्ष्मी भाई साहब के लिक्खे से प्रेरणा मिली और हम धन्य हुए !! :-))
    बेहद सुँदर आल्हा प्रेम पुराण रचा है सुकुलजी आपने अब दीवाली की मौज मनाइयेगा …

  17. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
  18. डा. अमर कुमार

    आनन्दम ? आनन्दम तो गये भाड़ में…
    अजी यह तो घोर आनन्दम…आनन्द हैं

    बहुतै मस्त लिख्यौ फ़ुरसतिया भाय
    ई तौ तुम्हरी अलबेली भलमंसी आय

    हँसावै के हद खतम किहो हम्मैं दिहौ लोटाय
    लोटत पलटत जानो हमार तो भईया पेट पिड़ाय

    पंडिताइन उल्टे हमपर अलग खिझीयाय
    फ़ुरसतिया पोस्ट जाओ अउर पढ़ौ जाय

    बुढ़वन का ऊई अब इश्क सिखलाय
    घर केर भेदी को है जो ई लंका ढाय

    विवेक भाई, यह पोस्ट बुढ़वन को लौंडा साबित करती है,
    अब इससे ज़्यादा और क्या चाहिये ब्लागर-विद्वानों को ?
    कृपया गौर करें, यह ज्ञानदत्त-एप्रूव्ड एन्ड सर्टिफ़ायड पोस्ट है

  19. राज भाटिया

    दीपावली पर आप को और आप के परिवार के लिए
    हार्दिक शुभकामनाएँ!
    धन्यवाद

  20. मानोशी

    बहुत मज़ा आया पढ़ कर। अनूप आपको और भाभी को दिवाली की शुभकामनायें और बच्चों को आशीष।

  21. नितिन

    फिर से पढा, मजा आ गया। इस पोस्ट की पोडकास्ट हो जाये तो आनंद चौगुना हो जायेगा।

    दीपावली की शुभकामनायें।

  22. ताऊ रामपुरिया

    परिवार व इष्ट मित्रो सहित आपको दीपावली की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं !

  23. भूतनाथ

    आपकी सुख समृद्धि और उन्नति में निरंतर वृद्धि होती रहे !
    दीप पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

  24. मीनाक्षी

    :) दीपावली पर्व पर चंचल चपला सी पोस्ट पढ़कर आनन्द आ गया… ज्ञानजी की बात पर गौर
    ज़रूर करिएगा… दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

  25. anitakumar

    :) दोबारा पढ़ी, तिबारा पढ़ी, चौबारा पढ़ी और उतना ही आंनद आया जितना पहली बार पढ़ने पर आया था। मां शारदा की अनुकंपा यूं ही आप पर बनी रहे। दिवाली की शुभकामनाएं

  26. Dr.Arvind Mishra

    अजब हाल है कनपुरिये का प्रेम रोग में डूब्यो जायं
    चढी जवानी अधेड़ उम्र की माँ शारदा करो सहाय

  27. ml gurjar

    bahoot badhiya budho me jaan phunk di

  28. अनूप भार्गव

    अरे ! हम काहे नहीं पढे इसे इतने दिन ?
    आनन्द मिला ….

  29. anupam agrawal

    प्रेम के बारे में सारे अच्छे अनुभव इस में डाल दिये हैं
    अब इन सब के सन और डाल दीजिये . लोग ठीक से समझ जायेंगे कि किस उमर में क्या करना आदर्श रहेगा .
    जिन का जो समय निकल गया है उनके लिए केवल दुआ .

  30. SANJAY SHESHKER

    GURU AAP NE JO LIKHA WO AAJ SHAYAD HI KOI LIKH PAYE

    MUJHE TO AAP DIKSHA DE DO…….

    SHARNAGAT…..
    SANJAH

  31. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176

    [...] कौन कहता है बुढ़ापे में इश्क का सिलसिला… [...]

  32. santosh

    सुनिके देवर की अल्हड़ता भौजी मंद-मंद मुस्कांय,
    भैया समझे तुरत इशारा सबको कीन्हा फौरन बाय।

  33. देवेन्द्र पाण्डेय

    बाप रे…!
    हौ पुराना मगर अभिहिनो बहुत जान हौ।

  34. shikha varshney

    हा हा हा ..हमने पहले नहीं पढ़ा था ..अभी पढ़ा ..जय हो महाराज आपकी.

  35. c s patel

    कौन कहता है ….

  36. c s patel

    मुह में दांत नहीं …. कोई बात नहीं
    चुम्मन के लिए दांत की जरुरत होती नहीं है !
    पेट में आंत नहीं ….. कोई बात नहीं ,
    प्रेम पचाने की चीज होती नहीं है !
    आँख में दीखता नहीं … कोई बात नहीं ,
    प्रेम देखने और दिखाने की जरुरत नहीं है !
    नीद आती नहीं …. कोई बात नहीं ,
    कल क्या करना है सोचने की वजह ही नहीं है !
    कौन कहता बुड़ापे प्रेम होता नहीं
    बुड़ापे में केवल प्रेम ही बचता है ,
    और कुछ जचता और बचता नहीं है !

  37. Sushil Bansal Sheel

    बन्धु
    हमरा चोला बहुत दुखी है
    राह है लम्बी
    जीवन छोटा
    कुछ शराब
    कुछ सिगरेट
    कुछ लापरवाही
    कुछ धुआं
    कुछ—-
    कुछ—-
    मन भी कैसा है?
    बन्धु !

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