तुमने चाहा थाऐसा हो एक घर जिसकी खिड़की सेदिखता हो सागरतुमने सागर में डूब जाना नहीं चाहा कभी डूबकर सागर ही हो जाना नहीं चाहा कभी डूब जाओसागर हो जाओ खिड़की से जो दिखेगा आखिर कब तक टिकेगा – हितेन्द्र अनंत

मुख्य भूमिका:  संजय मिश्रा,  रजत कपूर, सीमा पाहवा, माया सराओ, तरनजीत, मनु ऋषि चड्ढा, बृजेंद्र काला, योगेन्द्र टिक्कू कथा एवँ निर्देशन: रजत कपूर गीत: वरूण ग्रोवर संगीत: सागर देसाई संजय मिश्रा (बाऊजी) पुरानी दिल्ली के फतेहपुरी इलाके में अपने भाई रजत कपूर के साथ रहने वाला एक नितांत मध्यवर्गीय चरित्र है। संयुक्त परिवार की रोज […]

मुख्य भूमिका: सोमनाथ अवघडे, राजेश्वरी खरात, सूरज पवार, किशोर कदम, छाया कदम, नागराज मंजुळे कथा एवँ निर्देशन: नागरज मंजुळे आपने फैंड्री का प्रतिनिधि गीत और उसके पोस्टर देखे हैं। नायक और नायिका की तस्वीर देखकर आपने अनुमान लगा लिया है कि यह किशोरवय के प्रेम पर आधारित फिल्म है। फिल्म की चर्चाएँ पढ़-सुनकर आप यह […]

मुख्य भूमिका: जोकिन फीनिक्स, स्कार्लेट जोहांसन, एमी एडम्स (Joaquin Phoenix, Scarlett Johansson, Amy Adams)  निर्देशन एवं लेखन: स्पाइक जोंजे (Spike Jonze) भारत में हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘हर’ भावुकता और विज्ञान गल्प का अद्भुत मिश्रण है। भविष्य पर आधारित यह फिल्म आज से करीब तीस से पचास वर्ष आगे की दुनिया की कहानी […]

पुणे में ठण्ड का धरना, वसंत को कार्यभार देने से इंकार! – दैनिक वडाक्रांति हाल ही में आई वसंत पंचमी की तिथि के बाद ऋतुराज वसंत जब नगर की ओर अपना कार्यभार शीत से लेने आए, तो उन्हें नगर की सीमाओं के बाहर ही रोक दिया गया।  शीत ऋतु पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर की […]

फिल्म समीक्षा: हंसी तो फंसी मुख्य भूमिका: परिणिति चोपड़ा, सिद्धार्थ मल्होत्रा, शरत सक्सेना, मनोज जोशी, अदा शर्मा, नीना कुलकर्णी। निर्देशन: विनी मैथ्यू कथा: हर्षवर्धन कुलकर्णी यह उन फिल्मों में से एक है जो अपने ट्रेलर से कहीं ज्यादा अच्छी निकल आती हैं। कथानक साधारण है। नायक या नायिका को किसी से प्रेम होता है और […]

1. दोपहर का अंतर छोटे शहरों की सुबह जल्दी होती है लेकिन देर से शुरू होता है दिन यह दिन मौसम के हिसाब से बड़ा या छोटा हो सकता है लेकिन इन शहरों की दोपहर हमेशा लंबी होती है छोटे शहरों की शामें हसीन और रातें रंगीन हो भी सकती हैं और नहीं भी लेकिन […]

मराठी के प्रख्यात कवि, दलित चेतना के प्रमुख स्वर श्री नामदेव ढसाळ का आज सुबह निधन हो गया। उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी एक महान रचना “माणसाने” के अनुवाद का प्रयास ज़ारा अकरम खान, Krantikumar Arade और Dinesh Kapse के सहयोग से किया है। आप भी पढ़िये। (अनुवाद की सारी त्रुटियाँ केवल और केवल मेरी)। माणसाने – नामदेव ढसाळ ‌‌‌————– मनुष्य पहले तो […]

तुम पूजते आये थे अब तक जिन्हें   भांति-भांति के देवता सभी ऊंची थी उनकी प्रतिमाएँ मूक-हृदयहीन पत्थर की वह देखो  लड़ रहे हैं आपस में पत्थर के देवता सभी जैसे चूर कर देंगे एक दूसरे को अभी के अभी पर तुम ठहरो बस देखो तमाशा दूर से चूर हो जायें इनमें से बहुत से […]

कविता – उन्हें पहचानिये! वे आपको डराना चाहते हैं वैसे ही जैसे डराते हैं माँ-बाप बच्चों को कि चुप हो जाओ! नहीं तो भूत आ जाएगा! नहीं तो शेर आ जाएगा! नहीं तो उड़ी बाबा जाएगा! वे चाहते हैं कि बच्चों की तरह आप लिपटे रहें उनके पैरों से वे चाहते हैं कि आप “चुप […]

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